लेखनी कहानी -04-Jul-2022 जज़्बात
जज़्बात को शायरी के मैं नाम करुँगी
ग़म को ग़ज़ल में छुपा के मैं बयान करुँगी
मेरी हद ए मुहब्बत तुमको नहीं पता
मर जाऊँगी मैं फिर भी तुम्हें प्यार करुँगी
जाकर शहर उसने फिर हाल न पूछा
माँ ने कहा था बेटे तुझे याद करुँगी
जज़्बात के दरिया में वो डूब ही गई
कहती थी ख़ुदग़र्जी़ से ये पार करुँगी
अपने मेरे फिर लफ्ज़ के नशतर चलाएंगे
खामोश रह के रिश्तों का मैं ख्याल करुँगी
Pallavi
05-Jul-2022 03:02 PM
बहुत खूबसूरत
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Swati chourasia
05-Jul-2022 06:13 AM
बहुत खूब 👌
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Arvaz Ahmad
05-Jul-2022 08:34 AM
Shukrya
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Renu
04-Jul-2022 11:32 AM
👍👍
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Arvaz Ahmad
04-Jul-2022 12:07 PM
Shukriya
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